CM Yogi : Shravan Month को सेवा और Water Conservation का जनअभियान बनाने की अपील
CM Yogi ने 'योगी की पाती' में श्रावण मास को सेवा, स्वच्छता, Water Conservation और पर्यावरण संरक्षण का जनअभियान बनाने की अपील की। उन्होंने जनभागीदारी और प्रकृति संरक्षण पर जोर दिया।
CM Yogi : श्रावण मास के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से सेवा, स्वच्छता, Water Conservation और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया है। अपनी मासिक अपील 'योगी की पाती' में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रावण केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सामाजिक सहभागिता और लोकमंगल का संदेश देने वाला महीना भी है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि श्रावण मास को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखें, बल्कि इसे समाज और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर भी बनाएं। उनका कहना है कि जनभागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने जैसे अभियानों को व्यापक सफलता मिल सकती है।
CM Yogi ने बताया श्रावण का आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश
'योगी की पाती' में मुख्यमंत्री ने भगवान शिव के समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विषपान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सृष्टि की रक्षा के लिए किए गए सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शिव को जल अर्पित करने की परंपरा भी त्याग, कृतज्ञता और जनकल्याण की भावना से जुड़ी हुई है।
मेरे सम्मानित प्रदेशवासियों,
श्रावण माह लोकमंगल, श्रम-सम्मान एवं सामूहिकता का पावन पर्व है। प्रकृति नवसृजन का संदेश देती है तथा अन्नदाता का परिश्रम हरित समृद्धि के रूप में फलीभूत होने लगता है। सनातन संस्कृति में प्रकृति का यही नवोन्मेष शिव-आराधना से जुड़कर जीवन को संयम, सेवा और… pic.twitter.com/wA51a5CQgX — Yogi Adityanath (@myogiadityanath) August 3, 2026
मुख्यमंत्री के अनुसार भगवान शिव का स्वरूप प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देता है। श्रावण का महीना इसी भावना को जीवन में अपनाने का अवसर प्रदान करता है, जहां धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।
Water Conservation को बताया समय की सबसे बड़ी जरूरत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पंचतत्वों में जल जीवन का मूल आधार है और मौजूदा समय में Water Conservation सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं, जो जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं।
उन्होंने राजधानी लखनऊ की एक आवासीय सोसायटी का भी उल्लेख किया, जहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए प्रतिदिन हजारों लीटर पानी का भूजल पुनर्भरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस पहल को अनुकरणीय बताते हुए अन्य संस्थानों और नागरिकों से भी ऐसे प्रयास अपनाने की अपील की।
जलवायु परिवर्तन के दौर में प्रकृति को लौटाने का भी लें संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के बढ़ते दोहन के बीच केवल संसाधनों का उपयोग करना पर्याप्त नहीं है। प्रकृति से जितना लिया जाए, उतना उसे लौटाने का संकल्प भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु में धरती हरियाली से आच्छादित हो जाती है और ग्रामीण क्षेत्रों में धान की रोपाई के दौरान सामूहिक श्रम भारतीय संस्कृति की साझी परंपरा को दर्शाता है। वहीं, श्रावण में शिवालयों में उमड़ने वाली श्रद्धा समाज में सेवा और सामाजिक समरसता की भावना को भी मजबूत करती है।
श्रावण को जनभागीदारी का अभियान बनाने की अपील
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से श्रावण मास के दौरान सेवा, स्वच्छता, Water Conservation, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सद्भाव को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने प्रत्येक बूंद जल बचाने और प्रत्येक पौधे की रक्षा करने का संकल्प लेने का भी आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यदि समाज प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जनभागीदारी की भावना के साथ आगे बढ़ेगा, तो यही प्रयास समृद्ध, सुरक्षित और विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला साबित होंगे।